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Haan, Main Bihari Hoon

Vivekanand Jha
4.9/5 (24860 ratings)
Description:यह पुस्तक उन हिंसक घटनाओं को दर्शाती है जो मुंबई में रेलवे की परीक्षा देने गए बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों के साथ घटित हुई थीं। यह भारत के इतिहास का काला दिन था जब स्थानीय गुंड़ों ने छात्रों पर हमला कर उन्हें गम्भीर रूप से घायल कर दिया था और छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही वापस लौटना पड़ा था। यह पुस्तक इस बात का समर्थन करती है कि अब समय आ गया है जब हमें गम्भीरता से अपनी पहचान को परिभाषित करना होगा। यह उपन्यास, कहानी के मुख्य चरित्र एक नवयुवक बिहारी प्रभाष चन्द्र की बिहार के दरभंगा से मुंबई तक की उतार-चढ़ाव भरी एक साहसिक यात्रा का वर्णन करता है।यह पुस्तक मराठी अस्मिता, मराठी मानुष और बिहारी अस्मिता की अवधारणाओं का विश्लेशण करने पर मजबूर करती है जब आज के अशांत समय में श्रेत्रीय पहचान ने भारतीय राष्ट्रवाद की धारणा को बौना साबित कर दिया है। प्रभाष चन्द्र अपने साथी बिहारी भाइयों से आह्नान करता है कि आओ हम सब मिलकर जातिवाद के अभिशाप से ऊपर उठें और बिहारी के रूप में अपनी समान पहचान को पहचानें क्योंकि बिहार के विकास और उत्थान का यही एक मात्र मूल मंत्र है। बिहार का विकास--भारत का विकास।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with Haan, Main Bihari Hoon. To get started finding Haan, Main Bihari Hoon, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
242
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Peacock Books
Release
2016
ISBN
8124803919

Haan, Main Bihari Hoon

Vivekanand Jha
4.4/5 (1290744 ratings)
Description: यह पुस्तक उन हिंसक घटनाओं को दर्शाती है जो मुंबई में रेलवे की परीक्षा देने गए बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों के साथ घटित हुई थीं। यह भारत के इतिहास का काला दिन था जब स्थानीय गुंड़ों ने छात्रों पर हमला कर उन्हें गम्भीर रूप से घायल कर दिया था और छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही वापस लौटना पड़ा था। यह पुस्तक इस बात का समर्थन करती है कि अब समय आ गया है जब हमें गम्भीरता से अपनी पहचान को परिभाषित करना होगा। यह उपन्यास, कहानी के मुख्य चरित्र एक नवयुवक बिहारी प्रभाष चन्द्र की बिहार के दरभंगा से मुंबई तक की उतार-चढ़ाव भरी एक साहसिक यात्रा का वर्णन करता है।यह पुस्तक मराठी अस्मिता, मराठी मानुष और बिहारी अस्मिता की अवधारणाओं का विश्लेशण करने पर मजबूर करती है जब आज के अशांत समय में श्रेत्रीय पहचान ने भारतीय राष्ट्रवाद की धारणा को बौना साबित कर दिया है। प्रभाष चन्द्र अपने साथी बिहारी भाइयों से आह्नान करता है कि आओ हम सब मिलकर जातिवाद के अभिशाप से ऊपर उठें और बिहारी के रूप में अपनी समान पहचान को पहचानें क्योंकि बिहार के विकास और उत्थान का यही एक मात्र मूल मंत्र है। बिहार का विकास--भारत का विकास।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with Haan, Main Bihari Hoon. To get started finding Haan, Main Bihari Hoon, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
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242
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PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Peacock Books
Release
2016
ISBN
8124803919

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