Read Anywhere and on Any Device!

Special Offer | $0.00

Join Today And Start a 30-Day Free Trial and Get Exclusive Member Benefits to Access Millions Books for Free!

Read Anywhere and on Any Device!

  • Download on iOS
  • Download on Android
  • Download on iOS

धुप्पल

Bhagwaticharan Verma
4.9/5 (31428 ratings)
Description:आत्मकथात्मक उपन्यास...यह एक निर्विवाद तथ्य है कि अपने कथा-कृतित्व में अनेकानेक व्यक्ति-चरित्रों को उकेरने वाले साधनाशील रचनाकारों का अपना जीवन भी किसी महान कृति से कम महत्व नहीं रखता, इसीलिए उन विविध जीवनानुभवों को यथार्थतः कागज पर उतार लाना एक महत्त्वपूर्ण सृजनात्मक उपलब्धि ही माना जाएगा। इस नाते सुविख्यात कृती-व्यक्तित्व भगवतीचरण वर्मा की यह नवीनतम कथाकृति आत्मकथात्मक उपन्यासों में एक उल्लेखनीय स्थान की हकदार है।कस्बे का एक बालक कैसे भगवतीचरण वर्मा के रूप में स्वनामधन्य हुआ, इसे वह स्वयं ही नहीं जानता। जानता है तो सिर्फ उस जीवन-संघर्ष को जिसे वह धुप्पल करार देता है।आत्मकथा न लिखकर भगवती बाबू ने यह उपन्यास लिखा, यह बात उनके रचनाशील मन की अनवरत सृजनात्मक सक्रियता की ही सूचक है। ‘धुप्पल’ में जो गम्भीरता है, वह भगवती बाबू के चुटीले भाषा-शिल्प के बावजूद, अपनी तथ्यात्मकता का स्वाभाविक परिणाम है। लेखक के साथ-साथ इसमें एक युग मुखर हुआ है, जिसके अपने अन्तर्विरोध अगर लेखकीय अन्तर्विरोध भी रहे तो उन्होंने उसके सृजन को ही धारदार बनाया। इसलिए धुप्पल सिर्फ ‘धुप्पल’ ही नहीं, लेखकीय संघर्ष का सार्थक दस्तावेज़ भी है।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with धुप्पल. To get started finding धुप्पल, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
107
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Rajkamal Prakashan
Release
2004
ISBN
8126705787

धुप्पल

Bhagwaticharan Verma
4.4/5 (1290744 ratings)
Description: आत्मकथात्मक उपन्यास...यह एक निर्विवाद तथ्य है कि अपने कथा-कृतित्व में अनेकानेक व्यक्ति-चरित्रों को उकेरने वाले साधनाशील रचनाकारों का अपना जीवन भी किसी महान कृति से कम महत्व नहीं रखता, इसीलिए उन विविध जीवनानुभवों को यथार्थतः कागज पर उतार लाना एक महत्त्वपूर्ण सृजनात्मक उपलब्धि ही माना जाएगा। इस नाते सुविख्यात कृती-व्यक्तित्व भगवतीचरण वर्मा की यह नवीनतम कथाकृति आत्मकथात्मक उपन्यासों में एक उल्लेखनीय स्थान की हकदार है।कस्बे का एक बालक कैसे भगवतीचरण वर्मा के रूप में स्वनामधन्य हुआ, इसे वह स्वयं ही नहीं जानता। जानता है तो सिर्फ उस जीवन-संघर्ष को जिसे वह धुप्पल करार देता है।आत्मकथा न लिखकर भगवती बाबू ने यह उपन्यास लिखा, यह बात उनके रचनाशील मन की अनवरत सृजनात्मक सक्रियता की ही सूचक है। ‘धुप्पल’ में जो गम्भीरता है, वह भगवती बाबू के चुटीले भाषा-शिल्प के बावजूद, अपनी तथ्यात्मकता का स्वाभाविक परिणाम है। लेखक के साथ-साथ इसमें एक युग मुखर हुआ है, जिसके अपने अन्तर्विरोध अगर लेखकीय अन्तर्विरोध भी रहे तो उन्होंने उसके सृजन को ही धारदार बनाया। इसलिए धुप्पल सिर्फ ‘धुप्पल’ ही नहीं, लेखकीय संघर्ष का सार्थक दस्तावेज़ भी है।We have made it easy for you to find a PDF Ebooks without any digging. And by having access to our ebooks online or by storing it on your computer, you have convenient answers with धुप्पल. To get started finding धुप्पल, you are right to find our website which has a comprehensive collection of manuals listed.
Our library is the biggest of these that have literally hundreds of thousands of different products represented.
Pages
107
Format
PDF, EPUB & Kindle Edition
Publisher
Rajkamal Prakashan
Release
2004
ISBN
8126705787
loader